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Real Hindi story ,हिंदी सच्ची कहानी

Real Hindi story हिंदी सच्ची कहानी
Real Hindi story हिंदी सच्ची कहानी

Real Hindi story ,हिंदी सच्ची कहानी

एक गांव में पंकज नाम का लड़का था उसके बहुत सारे दोस्त भी थे लेकिन सभी दोस्त से अलग वही पंकज था बाकी दोस्त सभी सीधे-साधे है फिर भी पंकज उन लोगों से अलग ही था उसको दिमाग भी था और कल भी थी

 बाकी लोगों में से कुछ अच्छा सोच सब कुछ उसको मालूम भी था क्या अच्छा क्या बुरा दोस्तों को छोड़कर शहर चला गया शहर में छोटी-मोटी नौकरी कर ली थोड़ा बहुत तो पैसा भी कमाया दो-तीन साल के बाद वापस घर लौटा दोस्त तो कैसे थे वैसे ही थे गांव में फिर पंकज ने शादी कर ली शादी करने के बाद एक बच्चा भी हो गया बच्चा होने के बाद थोड़ा पैसों की कमी पड़ी फिर बीवी बच्चों को छोड़कर शहर चला गया 

नौकरी करने के लिए थोड़ा दिन नौकरी किया फिर बच्चों की याद आ रही थी तो फिर घर चला गया घर जाते जाते शहर से थोड़ा कर्जा भी ले लिया था अपने आप को स्मार्ट और चालू समझता था कुछ करेगा कुछ बनाएगा बाकी दोस्तों से अलग ही कुछ करूंगा सोचता था 

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लेकिन भगवान की मर्जी अपनी तकदीर अपना नसीब कहां लेकर जाता किसी को पता नहीं कर्ज लेकर गांव जाने के बाद थोड़ा दिन गांव में ठहरा फिर ऑफिस शहर आना पड़ा क्योंकि कर्ज उतारना था थोड़ा बहुत गांव में भी कर्ज ले लिया था शहर आने के बाद कर्ज चुकाना तो दूर की बात और कर्ज बढ़ने लगा बढ़ते बढ़ते हैं इतना कर्ज बढ़ गया था कि जैसे ही कर्ज़ का हिसाब करता उसका दिमाग ही खराब हो जाता था 

क्योंकि उतना कर्ज चुकाने की उसकी औकात ही नहीं थी और हिसाब करने लगता तो पागल ही हो जाता जिसके भी पैसे देने हैं सभी लोग उसको फोन करते उसके पास आते कुछ लोग गाली देकर जाते तो कुछ लोग धमकी देकर जाते हैं परेशान हो गया था फिर उसने अपना कांटेक्ट नंबर अपनी नौकरी सब कुछ चेंज करके अलग सी जगह नौकरी करने लगा सोचा अब तो कर्जा चुकाना ही पड़ेगा लेकिन नई नई जगह जहां भी जाता कर्ज बढ़ता जा रहा था कम होई नहीं रहा था फिर से उसनेहो जागा भी बदली दूसरे जगह गया ना किसी से कांटेक्ट किया अकेला काम करता रहा करता रहा

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• अकेला-अकेला अपने साथ ही अपने आप कोई नफरत करने लगा उसके जो भी दोस्त थे अपने दोस्त को समझ कर अपने दोस्त का पहले जैसा वह अपमान करता था अब वह उनकी इज्जत करता था मेरे से बड़े मेरे से बुद्धिमान और चला तो वह लोग हैं मैं तो एक मामूली उन लोगों से भी नीच आदमी हूं अपने आप से बोलता था क्योंकि उसके दोस्त गांव में जैसे थे वैसे ही है वैसे ही काम कर रहे थे ना उसके दोस्त किसी का भी कर्ज था ना किसी से लेना ना किसी को देना यह सभी सोच कर अपने आप को बहुत नफरत करता था और कर्जा उतारने की तो बात अलग है

 खुद को फांसी लगाकर मर जाने का मन कर रहा था फिर उसने सोचा अब कुछ करेंगे अब कुछ करेंगे फिर किसी एक आदमी ने उसको एक आईडिया दिया कि तुम कभी भी खुशी-खुशी बात नहीं कर सकते खुशी-खुशी बोल नहीं सकते कभी भी मुंह लटकाए हुए क्यों रहते हो बोला किसको क्या बताऊं मेरा हाल बेहाल है क्या करूं समझ में नहीं आता किसी को पता नहीं कभी उसको मन नहीं करता था वह आदमी डेलली पूछता था बताओ क्या है 

कुछ तो बताओ भाई तीन-चार दिन उसने पूछा लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया क्योंकि आपने आपसे जिंदगी से हार चुका था लेकिन अपने आपसे जिंदगी से हार चुका तो था क्योंकि अपने आप को कमजोर भी समझने लग गया था छोटे से छोटे बच्चे भिखारी को देख कर भी अपने से बड़ा अपने से अच्छा उसको भिखारी लगता था लेकिन खुद को बहुत बुरा समझता था फिर से 1 दिन उसी ने पूछा बताओ तो सही तुम क्यों ऐसे हो फिर एक दिन उसने बताई उसको अपनी पूरी कहानी कर्ज वाली उसने बताया जैसा मैं कहूं वैसा तुम करोगे तो कुछ हो सकता है 

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यह कर्ज तो क्या चाहो तो तुम एकदम से आगे भी बढ़ सकते हो अपना दिमाग अपनी ताकत अपना हौसला बढ़ाना पड़ेगा अगर तुम मेरी बात मानोगे तो मैं तुम्हें एक बात बताता हूं अच्छा लगा तो मुझे बोलो कहकर चला गया फिर भी उसको तो विश्वास ही नहीं था कि इतने साल तक कर्ज बढ़ता रहा बाकी परेशानी तो कुछ भी नहीं लेकिन कर्ज का ही उसको परेशानी था खुद से नफरत करने लगता था फिर उसने सोचा फिर एक बार इससे पूछ लूं कि मैं कैसे कर पाऊंगा एक काम फिर उसके पास गया पूछा उसने आप बोलिए मैं क्या कर सकता हूं 

ऐसा जो मैं जल्दी से जल्दी अपना कर्ज उतार कर खुद के पैरों में खड़ा हो जाऊं उस आदमी ने बताया कभी भी मत हारना हौसला ना रखना अपने आप को बुरा समझना अपने आप पर ही दुख ना यह गलत बात है हौसला रखो आगे बढ़ो कुछ ऐसा काम करो जो तुमने कभी ना किया हो यह समझ कर करो कि मैं कर सकता हूं पूरे कांफिडेंस के साथ करोगे पक्का आगे बढ़ो गे तो उसने बोला ठीक है मुझे कुछ काम दे दो मैं पूरी मेहनत लगाकर काम करूंगा

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 फिर उसने बोला ठीक है आज मेरे साथ आ जाओ एक जगह पर काम है उससे बात करवा कर मैं तुम्हारा दर्द दूर करने की कोशिश करूंगा लेकिन काम तुम्हें ही करना है दूसरे दिन वह उसके पास गया उसने जिसके पास काम था उसके पास लेकर गया वह बोला देखो भाई मेहनत तो करना पड़ेगा मेहनत के बिना फल नहीं मिलेगा दिन में जो भी करना है अपना काम करो शाम को 6:00 बजे से 12:00 बजे तक मेरे पास काम करो 6:00 से 12:00 तक का मैं तुम्हें 15000 सैलेरी दूंगा दिन में क्या काम करोगे दिन में भी कुछ काम करो और पैसा जितनी जरूरत है उतना ही

 खर्च करो बाकी पैसा जमा करने की कोशिश करो बाकी चीज को भूल जाओ कुछ दिनों के लिए पंकज बोला मेरे पास दिन में भी काम नहीं है अभी फिर वह आदमी बोला दिन में एक ऑफिस है वहां काम करो 15000 वहां मिलेगा 15000 मैं दूंगा 30000 हो जाता है खाना-पीना सभी मिलाकर 25000 तुम्हारा बच जाएगा तुम्हारा कर्ज
       
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कितना है क्या मुझे बता सकते हो उसने बताया मैं रखकर 350000 कर्ज है उसने बोला हो इतनी सी बात है फिर पंकज बोला मैंने कभी इतना कर्ज नहीं लिया था पहली बार है थोड़ा-थोड़ा करके इतना हो गया अब मेरा मन नहीं

 मान रहा था कि मैं इतना कर्ज चुका पाऊंगा आदमी बोला थोड़ा-थोड़ा करके तुमने 350000 कर्ज़ अपने सिर पर लिया है तो यह काम करके रात दिन मेहनत करके यह उतार नहीं सकते उतार सकता हूं कर सकता हूं यह उम्मीद रखो हो जाएगा पंकज बोलो ठीक है कड़ी मेहनत की दिन में भी काम किया रात को भी काम किया यह काम करते-करते 3 साल के अंदर उसने ज्यादा कर्ज चुका कर कम ही कर बचा था

 फिर उसने और ज्यादा कर्ज लेने ₹500000 कर्ज लिया खुद का एक दुकान खोला मोबाइल मोबाइल कवर मोबाइल के पार्ट्स सारा मोबाइल कंप्यूटर इन चीजों का सामान रखा वह ₹500000 उसने 6 महीने के अंदर ही सारा का सारा कर्ज उतार कर फ्री हो गया था फिर और एक 6 महीने के अंदर कर्ज लेने वाला आदमी कर्ज देने लगा
     
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तोदोस्तों हिम्मत कभी भी हारना नहीं चाहिए कभी भी यह सोच कर चलना चाहिए कि मैं कर पाऊंगा मेरे से होगा मैं कर सकता हूं अपना कन्फ्यूज्ड एंड सही अपनी जिंदगी है हार मानोगे नहीं हो सकता मेरा काम नहीं है यह मैं कैसे कर सकता हूं प्लीज सोचने से हम कहां है वहीं रह जाते हैं आगे बढ़ नहीं पाते तो दोस्तों आपको यह कार्य रियल कहानी कैसी लगी कमेंट में जरूर बता दीजिएगा लाइक शेयर जरूर कर दीजिएगा
                       Dhanyvad. धन्यवाद

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